Thursday, August 17, 2017

मर भी जाउ तो चैन कहाँ

मैं मर जाऊ तो 
कैसे उठेगा 
मेरा जनाजा 
तुम तो हो ही नही 
कौन देगा मुझे कांधा
कौन रोयेगा 
मेरी लाश के पास बैठ कर
कौन भरेगा हिचकिया
तुम तो हो नही
कौन देगा मुझे कांधा
सब आएंगे 
अफसोस जताकर 
चले जायेंगे
कुछ करेंगे 
मेरी पिछली जिंदगी का हिसाब
कुछ चुपके से मुस्कुरायेंगे
तुम तो हो ही नही 
जो सच मे करते 
मेरे जाने अफसोस
सब बस रस्म 
अदा करके चले जायेंगे
चलो अच्छा है
दर्द से नाता टूटेगा
कोई तो होगा 
जो  उस पार मेरे
इंतेज़ार में होगा
मिलेंगे उस से
सब गम 
दोहराये जाएंगे
तुम तो हो ही नही
हम जी के भी 
क्या पाएंगे

1 Comments:

At August 23, 2017 at 5:39 AM , Anonymous Anonymous said...

:(

 

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