Tuesday, March 13, 2018

कुछ दिल से

तुम से बिछड़ने का
गम ऐसा है
मेरे हमदम

सांसे थम चुकी है
लोग कहते है
जिंदा हो तुम


जिंदगी तो
रोज मिलती है
जीने के लिए
मौत ही कमबख्त
एक बार आती है
मरने के लिए.......अप्पू
अपनी यादों की रजाई लपेट कर रख ली है मैंने.....

अगली सर्दी में उसे फिर से ओढूंगी.....

फुरसत है
तुम्हे सोचने की
तमाम उम्र

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