Friday, June 17, 2011

जीवन तेरे रंग अनेक


जीवन तेरे रंग अनेक
लिख दू इस पर क्या क्या मैं
विषय बड़ा हैं नेक
जीवन मे कभी दुख कभी सुख आता
जीवन को रंगो से भर जाता
कही खुशी हैं कही हैं मातम
कही उजाला कही घोर तम
कैसे हो सब जगह रंग एक सा
हरदम सोचु बैठ के यक सा
नही हो सकता रंग एक सा
कहता प्रभु हमसे ये आ के
इन्सा करमो का फल पाता हैं
करमो के हिसाब से ही वो
हंसता   और गाता हैं
पिछले  पुण्य की पूंजी इंसान बन
हम इस जनम मे पाते हैं
जब पूंजी समाप्त हो जाती
सारे रंग खो जाते हैं
कर्म करे हम अच्छे
बने एक दम सच्चे
रंग सभी भर जाएँगे
हम भी दुनिया मे सबसे सुखी कहलाएँगे

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