Friday, June 17, 2011

चार दिन का चक्कर भैया


चार दिन का चक्कर भैया
ये जिंदगानी हैं सारी
ना ले इसमे सबसे टक्कर
जिंदगानी गर प्यारी
संघर्षो से टकरा कर के तू
टूट फूट यू जाएगा
ना ले पाएगा असली आनंद तू
उलझ के यू रह जाएगा
चार दिनो के इस मेले मे
खुशी खुशी तू जीता जा
करता जा जो काम पसंद हो
राम नाम तू भजता जा
राम तेरे संग चलेंगे
वो ही बेड़ा पार करेंगे
ऐसा मॅन मे सोच ले यार
पार हो जाएगी जीवन नैया
नही रहेगा मॅन पे कोई भार
इस रोज़ी रोटी के झगड़े मे
वो ही तो हैं एक आधार

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