Saturday, July 2, 2011

मैने रेत को हाथ मे उठाया




मैने रेत को हाथ मे उठाया
तो वो फिसल गई
मैने जिंदगी को 
गले से लगाया
तो वो  मचल गई
कहाँ रुकती है?
ये जिंदगी
ये तो साथ चलती है..
सांसो का दामन 
थाम के
आगे बढ़ती ही जाती है
थम जाए साँसे
तो कहाँ  है जिंदगी?
बातों ही बातों मे देखो
कैसे निकल गई जिंदगी
रेत और जिंदगी
एक जैसी है
पकड़ लो इनको..
नही रहती ये 
वैसी की वैसी है..
आना और जाना 
दुनिया की रवानी है
जो जिंदगी मे 
कुछ कर जाए
उसकी अलग निशानी है
निशानी को अंजाम
दे दो तुम
तो कुछ संभल 
जाए जिंदगी
वरना यू ही बेकार बातों मे
उलझ जाए जिंदगी
मैने प्यार से 
समझाया तो देखो
कैसे संभल गई जिंदगी

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