Tuesday, August 9, 2011

कुछ ना कर पाने का गम


जिंदगी मे कुछ ना 
कर पाने का गम
कितना सालता हैं हरदम
उनसे पूछो जो चाह कर भी 
कुछ नही कर पाते हैं
और उम्र भर इस गम को
दिल मे दबाए पछताते हैं.
कल मुलाकात हुई एक युवक से
बनना चाहता था आइ ए एस अफ़सर
लेकिन बन गया छोटा सा क्लर्क
अब उसके अफ़सर बनने की भूख
उसकी आँखो मे साफ नज़र आती हैं
चला रहा होता हैं कलम लेकिन..
विवशता सामने दिख जाती हैं....
ऐसे ही हमारे छोटे भाई 
बनना चाहते थे पत्रकार
परिस्थितियो ने थमा दिया व्यापार
अब बेचारे ना तो ठीक से 
व्यापार कर पाते हैं और 
ना ही कुछ लिख पाते हैं
कलम उठाते हैं हिसाब लिखने को
बढ़िया सा लेख लिख जाते हैं.....
हिसाब की किताब वही छूट जाती हैं
जिंदगी तो शायद ऐसी ही हैं
सोचो कुछ हो कुछ जाता हैं
माँगो आम ईमली हाथ आता हैं
ऐसे मे हारना नही हैं..
जो दिया भगवान ने
हंस के ले लेना हैं.....
हंस हंस के जीना हैं...
नया कुछ करना हैं.....
और भी हैं राहे बस 
तलाश करना हैं!!!!!!!!!!

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