Thursday, January 17, 2013

मृत्यु गीत तुम रचते जाओ





तुम कालो के भी काल हो 
गर समझो ....स्वय को ...सब कुछ  
नहीं बने तुम मृत्यु  गाल हो 
मेरी मानो अपना मृत्यु गीत स्वय लिखो 
मत रचने दो किसी को साजिश 
मत सोचो ...किसने किया हैं ...ये कुछ 
अपनी पीड़ा सहते जाओ 
मृत्यु गीत तुम रचते जाओ 
रच दो इतिहास जगत में ऐसा 
मिट जाये तम,  न रहे अँधेरा 
शूरवीर हो,  स्वय को पहचानो 
शत्रु के आगे न समर्पित जानो 
कोई आ  जाये तुमसे टकराने 
आगे बढ़कर उसे भगाओ 
मृत्यु गीत तुम रचते जाओं 
खुद में जीवन भरते जाओ 
मृत्यु गीत तुम रचते जाओ।

0 Comments:

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home