Tuesday, January 15, 2013

अच्छे दिन फिर आएँगे..

मत रो मेरे बंधु सखा तुम 
जीवन मे ऐसे भी पल आते हैं
जिनको माना अपना सब कुछ..
बीच कहीं छूट जाते हैं...
कुछ होते हैं बेबस इतने..
चाँद पार बस जाते हैं..
कुछ होते हैं अहम के मारे...
अपना अहम दिखाते हैं..
मत रो मेरे सखा तुम..
अच्छे दिन भी आएँगे..
छोड़ गये जो अपना घोसला
फिर से नीड बनाएँगे....
लौटेंगे वो तेरी खातिर
अच्छा वक़्त बिताएँगे
मत रो मेरे बंधु सखा तुम
अच्छे दिन फिर आएँगे..



1 Comments:

At January 20, 2013 at 8:01 PM , Anonymous Anonymous said...

saye kabhi door hoten hai kya .......??
saye hamesha saath hoten hai .....yaad rakhna..

 

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