Saturday, January 12, 2013

कोमल कविता का जनम






लिखने के सफ़र मे 
मुहूर्त नही देखा जाता
जो आता हैं दिल मे 
वो शब्दो मे 
यकायक ढल जाता 
क्या कहूँ कौन सी ?
कविता बन जाती हैं..
जब लेखनी अपने
कहने पे आती हैं..
रह नही जाता फिर
दिल मे कुछ भी..
शशक्त मन से 
कोमल कविता का जनम 
पल मे हो जाता..

अपर्णा





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