Friday, September 6, 2013

कहाँ गया वो जो तेरा था.. तुझसे ही प्यार करता था..



कहाँ गया वो
जो तेरा था..
तुझसे ही
प्यार करता था..
तेरे इंतज़ार मे अपनी
राते तमाम करता था..
भीग कर भी पूरा का पूरा..
तुझे ही याद करता था..
तेरे आने की राह
देखता देखता भूखा ही सो जाता..
फिर भी तेरा ही
इंतज़ार करता था..
तेरे ख़यालो मे रहता
इतना गुम कि...
छोटे से घर को भी
महल कहा करता था..
तुझे समझता था हीरा..
कहीं गुम ना हो जाए तू..
इसी कारण तुझे
कोहिनूर कहा करता था..
कहाँ गया वो अब जो
तेरे दीदार को तरसता था..
तेरा था वो..और तुझसे ही
बेपनाह प्यार करता था..

2 Comments:

At September 8, 2013 at 3:57 AM , Anonymous Anonymous said...

shant panee me kankar markar poochhten hain vo .....
ki tera ask dhundhla dhundhla sa kyun lahta hai mujhe ......
aaine ko tirchha pakad ...sochten hai vo ki uska ask
mere ask se ghabra- ghabraya ..kyun hai ...

chand shabd ..badal dene se ..is baat ke mayne kuchh yun ho gye ....( gustakhi muaaf kijiyega )

खोया नहीं है वो
जो तेरा था..
तुझसे ही
प्यार करता था..
तेरे इंतज़ार मे अपनी
राते तमाम करता था.....
भीग कर भी पूरा का पूरा..
तुझे ही याद करता था..
तेरे आने की राह
देखता देखता भूखा ही सो जाता..
फिर भी तेरा ही
इंतज़ार करता था..
तेरे ख़यालो मे रहता
इतना गुम कि...
छोटे से घर को भी
महल कहा करता था..
तुझे समझता था हीरा..
कहीं गुम ना हो जाए तू..
इसी कारण तुझे
कोहिनूर कहा करता था..
यहीं कहीं है वो अब जो
तेरे दीदार को तरसता था..
तेरा था वो..और तुझसे ही
बेपनाह प्यार करता था.

 
At September 9, 2013 at 12:03 AM , Blogger Aparna Khare said...

shukriya Dost

 

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home