Friday, August 30, 2013

कॉफी टेबल

लगता हैं जीवन मे बदलाव आया हैं..
खुश हो गई हैं फ़िज़ा..नया मौसम आया हैं..
तभी कॉफी टेबल को भी...आपके साथ.....
वक़्त बिताने के लिए.....उनका साथ भाया हैं..
(ये लम्हे कभी ख़तम ना हो..)

चेहरे पे सच्चाई...आँखो मे कुछ करने का जुनून..
यही तो आपको सबसे अलग बनाता हैं...
यही भाव आपकी जिंदगी मे...सुकून भी लाता हैं..
(मस्त लग रहे हैं...)

फ़ैसला करना नही उनको...ताल्लुक  टूट जाएँगे..
जो उमीद बँधने की हैं..किनारे छूट जाएँगे..तभी तो...
'फ़ासले मंजूर हैं उनको..फ़ैसले मंजूर नही..

सब कुछ वैसा का वैसा..हैं..तुम आओ तो सही
मिल कर बैठेंगे..पैमाने फिर भर जाएँगे..
नही हो निराश अच्छे दिन फिर आएँगे..


4 Comments:

At August 30, 2013 at 5:50 AM , Blogger नीलिमा शर्मा said...

एक उम्मीद बंधाती रचना ...........

 
At August 30, 2013 at 7:46 AM , Anonymous Anonymous said...

:)

 
At August 31, 2013 at 12:12 AM , Blogger अपर्णा खरे said...

Shukriya Neelima ji..

 
At August 31, 2013 at 12:13 AM , Blogger अपर्णा खरे said...

thanks

 

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