Thursday, June 23, 2011

तुम्हे आज़ाद करती हूँ.



तुम्हे आज़ाद करती हूँ..
अपनी मीठी बातों से,
अपने प्यारे अल्फाज़ों से..
अपने अनकहे
जज्बातो से..
तुम्हे आज़ाद करती हूँ
तुम्हे याद होगा
कभी की थी
ना जाने कितनी बातें..
वो तुम्हारी याद मे
जागती
हमारी…रातें..
उन बातें से..रातो से..
तुम्हे आज़ाद करती हूँ..
तुम्हे सोचा था मैने
सुबहो शाम..
तुम्हे चाहा था मैने
बिना किए विश्राम..
अपनी चाहतो से..
अपनी सांसो से.
तुम्हे आज़ाद करती हूँ..
तुम्हारे अनगिनत
किए वादे…
वो कसमे..वो इरादे..
तुम्हे उन दृढ़ इरादो से
उन सभी वादो से…
आज़ाद करती हूँ………
कभी सोचा ना था
ऐसा दिन भी आएगा…
तुम्हारा नाम ना लू..
वो लम्हा भी आएगा..
मेरा अपना आप
मुझसे यू दूर जाएगा…
चलो तुम्हारी खुशी की खातिर….
तुम्हे आज़ाद करती हूँ…….
जहाँ रहना
सदा खुश रहना………
यही बस तमन्ना है…
क्यूंकी
तुम्हारे बिना रह पाउँ,
अधूरी ये चाहत
हमारी है……
कभी हम फिर मिलेंगे…
तुम आवाज़ मत देना…
सुन ली
तुम्हारी सदा मैने….
तो फिर मैं टूट जाउगी…
तुम्हे आज़ाद करती हूँ..
अपनी मीठी बातों से,
अपने प्यारे अल्फाज़ो से..
अपने अनकहे जज्बातो से..
तुम्हे…..

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