Thursday, August 4, 2011

मिलेगी ना दोबारा..........

सिसकियो को रोशनी दो..
बन जाए आग ये......
जला दे उसका घर....
जिसने दी महरूमीयत.....
आह के ढेर मे चिंगारी छिपी हैं
ढूँढ लो....कर दो सबको राख अब
बचे ना कहीं तनहाईयाँ.............
बिखर गई जो जिंदगी...........
दोनो हाथों से समेट लो..
मन मे बचे ना मलाल..
दर्पण के टूटने का.......
ऐसी आग बिखेर दो..........
जिंदगी तो जिंदगी हैं
मिलेगी ना दोबारा..........

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