Tuesday, January 17, 2012


जो हैं सबके खुदा जा रहे हैं स्कूटर पे 
शामिल होने किसी प्रतियोगिता मे 
उन्हे क्या पता जिंदगी की सारी 
प्रतियोगिता वो ही तो आयोजित करते हैं 
लोगो की आँख मे धूल भरने को 
खुद प्रतियोगी होने का ढोंग करते हैं 
कल फस गये बेचारे इंसानो के चक्कर मे 
देखा क्राइस्ट का भेष बना के चर्च के आगे खड़े थे 
सोच रहे थे प्रार्थना के बाद जब सब गुजरेंगे 
मुझे देख खुश हो जाएँगे...
मेरे लिए हमेशा रोते रहते हैं 
देखते ही खुश हो जाएँगे 
लेकिन हुआ इसका ठीक उल्टा 
लोग बाहर आए उन्हे देखा और 
कहने लगे ढोंग करते हो 
पहन कर क्राइस्ट की ड्रेस हमे ठगते हो 
बेचारे देते रह गये दुहाई मैं सच्चा हूँ 
लेकिन किसी ने नही माना........ 
लोग बोले मैने खुद से किया हैं उन्हे क्रूसीफाइ 
कैसे मान ले कि तुम असली हो 
अब उस जमाने मे कोई आइ डी प्रूफ तो 
होता नही था जो वो दिखलते 
बेचारे तरह तरह से रहे ...उन्हे समझाते 
फिर भी किसी को समझ नही आया 
उनको उल्टा स्वर्ग का रास्ता दिखलाया 
आप आप भी ना पड़े लोगो के चक्कर मे 
असली वेश मे रहे, ना पड़े मुफ़्त के चक्कर मे 
अगर खुदा ने भी अपना असली रंग दिखाया तो 
हम सब भी चक्कर मे पड़ जाएँगे 
उसके एक उंगली घूमते ही 
तीनो लोक दिख जाएँगे इसलिए 
खुदा आप भी मुझे माफ़ करना 
अपना हरदम हम सब पे इंसाफ़ करना

3 Comments:

At January 17, 2012 at 7:08 PM , Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

भरे हुए हैं जगत में, ज्यादा ढोंगी लोग।
छल-प्रपंच को साथ ले, खाते मोहन भोग।।
--
शब्दपुष्टिकरण हटा दीजिए न!

 
At January 17, 2012 at 8:50 PM , Blogger ईं.प्रदीप कुमार साहनी said...

बहुत खूब |

मेरी कविता:वो एक ख्वाब था

 
At January 18, 2012 at 5:45 AM , Blogger Kailash Sharma said...

बहुत भावपूर्ण सशक्त प्रस्तुति..

 

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