Sunday, April 15, 2012

जिंदगी हमे किस मोड़ पे ले आई..

चलो एक बार फिर से
वैसे ही हो जाए
जैसे हम पहली बार मिले थे
निकाली थी पहचान
आहिस्ता आहिस्ता
डरते हुए पूछा था......
क्या करती हैं आप?
और मैने भी सकपका कर
जवाब दिया था ..पढ़ती हूँ...
मुझे क्या पता था.. कि
आँखो को पढ़ने की
आदत लग जाएगी,
हर वक़्त तुम्हारी मुस्कुराती आँखे ही
याद आएँगी...
जो मुझे मुझसे ही..कहीं दूर.........
बहुत दूर.................................
तुम्हारे पास ले जाएँगी........और
मेरी पढ़ाई ही मेरे इतने .............काम आएगी..
तुमको पढ़ते हुए मेरी जिंदगी..........
कैसे, कब बीत जाएगी..
तुम्हारे साथ नई पहचान हमे
इस मोड़ तक ले आएगी..




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