Wednesday, February 27, 2013

तुम्हारे निर्णय



तुम मेरा अभिमान हो 
ये बात तुमने मानी लेकिन
समय निकल जाने के बाद
मैं तो तुम्हारे निर्णय को 
अंतिम समझ..............
जीवन मे उतार बैठी...
गर्विता समझती रही खुद को....
तुम्हारे निर्णय को अपना कर...
आज भी बहुत खुश हूँ....
तुमको पाकर...तुमको सोचकर...अपना कर..



3 Comments:

At February 28, 2013 at 6:18 AM , Blogger तुषार राज रस्तोगी said...

बहुत उम्दा रचना | बधाई

Tamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page

 
At February 28, 2013 at 6:49 AM , Blogger तुषार राज रस्तोगी said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय ब्लॉग बुलेटिन पर |

 
At March 1, 2013 at 12:23 AM , Blogger Aparna Khare said...

Shukriya dost ..hausala badhane ka....

 

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

Links to this post:

Create a Link

<< Home