Friday, May 31, 2013

एहसान



शब्द नही मिलते
तुमसे कुछ कहने को..
भर देते हो हमे इतना..
अपनी नज़रो से..
जगह नही रहती कुछ रखने को..
(तुम्हारा एहसान बढ़ता ही जा रहा हैं मुझ पर..)


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