Sunday, July 16, 2017

हा तुम 
मेरे अपराधी हो..
हुआ हैं 
तुमसे अपराध 
मेरी तस्वीरो को..
ना सहेजने का..
मेरी आवाज़ को 
अनसुना करने का
मेरे फूलो को 
झरने से 
ना बचा पाने का 
मुझे दूर से 
निहारने का..
लेकिन 
मैने तुम्हे 
माफ़ किया..
क्यूंकी 
तुम भी 
मजबूर थे..
समय के .
हाथो...

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