Tuesday, January 8, 2013

कौन करेगा चाँद की मिन्नते ..कौन नाज़ उठाएगा..??



आँखो का जाम अच्छा..सुन तेरा नाम.... मेरे नाम से अच्छा

माँ की दुआ का ये असर निकला..
बेटा मुसीबतो के कहर से भी बेअसर निकला..
मिली जो छाँव आँचल की..
आँचल मे ही खुदा निकला..

सो गये तुम तो हमारा क्या होगा..
देखो सपने सारी रात..जागना हमारा होगा..

संभाल के रखना मेरा ये गुलाब का फूल
कहीं ना बन जाए किसी दिन ये तेरे लिए शूल

भूले बिसरे लम्हे फिर से याद आते हैं
जब भी चलती हैं बर्फ़ीली हवा तेरे वादे याद आते हैं 

मत सुनना दिल की बात
सनम का भूल जाना
रुसवाई की बात
हैं भरोसा जो खुद पे..
मत देना दुहाई ...लौट आने की..बात

नही समझे जवाब तो साथ आया हैं
भीगा हैं जो खत..आँसू से धुल आया हैं.

क्या करे अतीत को गले लगाया हैं
भविष्य हैं कि अभी पराया हैं..
वर्तमान हैं अभी छोटा सा..
अपने पैरो पे खड़ा नही हो पाया हैं..

गर समय को समय पे पहचान लिया 
समझो एक बार मे सारा संसार नाप लिया..

जमाने मे हैं दहशत ज़्यादा
हम भी हैं दर्द मे डूबे..
कोई कैसे हमसे रूठे..
हम भी हैं अपने मे डूबे

प्यार हुआ जो सूरज से चाँद कहाँ जाएगा
कौन करेगा चाँद की मिन्नते ..कौन नाज़ उठाएगा..??

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