Thursday, September 11, 2014

एक डायरी ......उन पलों की दस्तक...


थाम कर हाथों मे हाथ..जिन्हे आँखो ने क़ैद किया 
ये डायरी नही ..खजाना हैं बीते पलों का..जो गुज़रे थे साथ साथ...
लफ़जो ने ज़ुबान दी...चल कर बेधड़क गये हमारे पास.... 
सच यादें ना होती तो ....ये जीवन भी ना होता  
अगर होता भी तो कितना सूना सा...जैसे सुर बिना संगीत............ 
जैसे साजन बिना मीत..सब कितना अधूरा अधूरा सा होता 
नही होते जिंदगी मे रंग..जो बिखेरते छटा..चहु ओर 
हाय मैं भी क्या लेकर बैठ गई..बिना रंगो की बेजान सी दुनिया 
जब मुझे नही पसंद ..तो आपको क्या पसंद आएगी..हैं ना..चलो रंगों की बात करे 
एक बार फिर से वही गुजरा हुआ पल याद करे.... 
यादों की उड़ान दे...शब्दों को छलाँग दे 
फिर से वही पहुच जाए...जहाँ से छोड़ आए थे सपने...अपने अपने.. 

4 Comments:

At September 11, 2014 at 4:19 AM , Blogger Upasna Siag said...

बहुत बढ़िया .....

 
At September 11, 2014 at 5:40 AM , Blogger राजेंद्र कुमार said...

आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (12.09.2014) को "छोटी छोटी बड़ी बातें" (चर्चा अंक-1734)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

 
At September 12, 2014 at 11:01 PM , Blogger Vaanbhatt said...

बहुत खूब...

 
At April 26, 2015 at 9:29 AM , Anonymous Anonymous said...

:)

 

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