Wednesday, July 20, 2016

खाक होगा तू, तेरा गुरूर

ख़ाक हो जायेगा 
एक दिन ये शरीर
पड़ी रह जायेगी
सारी जागीर
न होगा तू 
न तेरा गुरूर होगा

एक तेरी याद होगी
कुछ तेरी महक का
सुरूर होगा

लोग करेंगे तेरी बातें
बातों में कुछ अच्छा
कुछ दबे लफ्जों में
बुरा तेरा जिक्र होगा

किया जो तूने उम्र भर
औरों का 
हक़ मार का इकठ्ठा
एक कतरा भी न तेरा 
अपना हुजूर होगा

सारी शानो शौकत
धरती पे ही रह जायेगी
रूह से बहुत दूर 
तेरा शरीर होगा

न बचेगी ग़मों की बारिशें
न सुखों का कोई एहसास रहेगा
बन्दे जा मिलेगा उस खुदा से
खुदा का तू नूर होगा

सारी ख्वाहिशें
सारी कोशिशे
सारे यकीन
जिन्दा रहने तक
अंत में तू होगा
तेरा बेजा फितूर होगा

मिला जो चोला मिटटी का
वो भी तुझसे बिछड़ कर
बेनूर होगा

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