Saturday, January 12, 2013

हम नारियो की खूबी हैं..



दहकते टेसू, दपदपाते गुलाब... 
पलकें झुकाती शामें 
अंधेरों के साथ बढ़ती आब, 
हमारी कहानी यही नही ख़तम होती
अभी भी बहुत कुछ बाकी हैं..
ये तो थी हमारे सौंदर्य की बात..
हज़ारो गुण अभी बाकी हैं..
सहनशीलता, त्याग, तपस्या 
कोई हमसे सीखे..
विश्वास हमारी पूंजी हैं..
रखते हैं बाँध कर आँचल मे..
ये ही हम नारियो की खूबी हैं..





आज कल आईना किसी को पसंद नही
सब झूठी तारीफ के लिए भटकते हैं
जिंदगी भी आज़ाद पंछी की तरह..
उड़ना चाहती हैं..छूना चाहती हैं नीला आसमान
उसे जगह दे, पंख फैलाए और.......सैर कर आए..
पता नही जनम मिले या ना मिले दोबारा


आज से तुम भी खुश तुम्हारी जिंदगी भी खुश..



जिंदगी मे एक ही अच्छा काम किया
हर कदम पे मोहब्बत का जाम पिया

कूच कर फेक  दो सर दुश्मनो का
चलो की हम भी तेरे साथ चले

आज से तुम भी खुश 
तुम्हारी जिंदगी भी खुश..

दीवार पे ना लिखा होगा तक़दीर का लिखा
वरना मिट जाता एक ही बरसात मे

लटके हैं पैर कब्र मे क्या करे बेचारे
नही बचा सकते इज़्ज़त हिन्दुस्तान की..
खड़े हैं जनता के आगे हाथ पसारे..भगवान माफ़ करे..

दिल को करो काबू मे
हर एक पे क्यूँ फिसला जाए

क्यूँ बनाया जिंदगी अपनी
जब भरोसा ही ना था..मुझ पर 

कोमल कविता का जनम






लिखने के सफ़र मे 
मुहूर्त नही देखा जाता
जो आता हैं दिल मे 
वो शब्दो मे 
यकायक ढल जाता 
क्या कहूँ कौन सी ?
कविता बन जाती हैं..
जब लेखनी अपने
कहने पे आती हैं..
रह नही जाता फिर
दिल मे कुछ भी..
शशक्त मन से 
कोमल कविता का जनम 
पल मे हो जाता..

अपर्णा





Friday, January 11, 2013

तेरा प्यार हैं मौन.

तुझे भूल के रह सकता हैं भला जिंदा कौन.. 
तू हैं अरमान किसी का...फिर भी तेरा प्यार हैं मौन.. 



कविता चाहे तो खोज सकती हैं अपना ठौर 

लेकिन वो रहना चाहती हैं तुम्हारे मन मे, 
तभी तो नही जाती तुम्हे छोड़ कर कभी.. 
चाहे सुख हो या आए तेरे जीवन मे दुख का दौर.. 

तुमको बदलते देख मैं भी बदल गया.. 
क्या करू यार जमाने का चलन नया.. 

हाथो मे गुलाब हैं...तुम मे जो बात हैं...औरों मे कहाँ? 

वो प्यार से कहते तो भी हम ना जाते 
हम कोई गैर नही हैं उनके लिए जो रहे आते जाते.. 

दिल की बात जाने हैं दिलवाला.. 
बाकी तो जो मिला वो था दिल जलाने वाला 


सच कहा तुमने..लेकिन जो घाव
तुमने दिया उसका क्या?

देखा जो तेरा नाम इन हाथ की लकीरो मे..
एक अक्स उभर आया..नम आँखो मे..

देश से प्रेम दुश्मनो को करारा जवाब..
यही हैं हमारे दिल मे..प्यारा एहसास

आज लौटा दो मुझे मेरे सारे खत



 मेरा कहना मानो तुम लगा लो मोहब्बत को गले.. 

गम बाद मे तुम्हारे पास खुद जाएगा.. 
कभी ना सुलझ पाओगे..कभी ना हिसाब कर पाओगे 
जिंदगी चली जाएगी...फिर हाथ मलते रह जाओगे.. 
अभी लो मज़ा सुकूने जिंदगी का..वरना पछताओगे.. 
कहाँ पढ़ पाता हैं कोई ठीक से ढाई आखर भी 
सब बने फिरते हैं पंडित यू ही.. 
बीवी मिली लक्ष्मी जैसी, बुरे शौक दिया सब छुड़वाय, 
रोते हो क्यूँ भैया, सब अच्छा हो जाए .. 
बाबू जी अभी भी कुछ नही बिगड़ा हैं.. 
ठान ले अगर मन मे तो क्या नही हो सकता हैं 
मिटा देंगे उनकी हस्ती को..जो हमसे भिड़ा हैं.. 
क्या करते हो जी.. 
पहले करते हो मोहब्बत 
फिर तरसते हो जी.. 
रोज़ महबूबा बदलना इसमे खूबी क्या हैं 
ये तो नीचता की निशानी हैं.. 
मोहब्बत तो एक बार होती हैं.. 
जन्मो जन्मो तक साथ चलती हैं 
देख बिज़ली मॅटरु का मंडोला 
अब कहाँ जाए बिज़ली..कहाँ खाए हिचकोला  
वक़्त ने की वफ़ा आप हमारे हुए.. 
हम आप के साथ साथ सबके भी प्यारे हुए.. 
आप पुराने, आपका प्यार पुराना 
करते हो वफ़ा सबसे..तुमसे क्यूँ ना हो जमाना 
औरत तेरी अज़ब कहानी.. 
जिसने चाहा उसने लूटा.. 
मार लिया आँखो पानी 

Wednesday, January 9, 2013

दूरिया मिट सकती हैं



वजह समझ आ जाए 
दूरियो की..तो 
दूरिया मिट सकती हैं
लेकिन ना बताए कोई कारण तो
ये और भी बढ़ सकती हैं..
लौट आओ मेरे हमसफ़र
अभी साँस बाकी हैं...
इंतेज़ार बाकी हैं..
चाँद अल्फ़ाज़ बाकी हैं...
ऐसा ना हो जब तुम
लौट कर आओ तो कही
बहुत देर ना हो जाए
थम जाए ना साँस की लड़िया..
कुछ हाथ ही ना आए..
रह जाओ तुम अकेले..भरे संसार मे
कोई ना मिले तुम्हे 
मेरी तरह टूट के चाहने वाला
गले से लगाने वाला
मिन्नतो से बुलाने वाला..
तब तुम कहाँ जाओगे...
इसीलिए कहती हूँ
दे दो चंद खुशियो की घड़ी
अगर प्यार करते हो..
थोड़ा सा भी अगर 
मुझपे एतबार करते हो..
तुम्हारा क्या जाएगा
हाँ किसी इंसान के जीवन मे
कुछ पल खुशियो का 
भले ही लौट आएगा..
सुन रहे हो ना तुम..मेरी बात

तुम्हारे हर गर्म लिबास मे हैं..



एहसास तो करो हमारा..
हम भी यही आस पास हैं..
छिप गये हैं तुम्हारी धड़कन  मे..
तुम्हारे हर गर्म लिबास मे हैं..

कितने खुशनसीब हो तुम 
एक अच्छी किताब हाथ मे हैं
पढ़ लो हर पन्ना..
किताब अभी सही हालात मे हैं..

जिंदगी मे एक भी हो ..
टूट के चाहने वाला..
जिंदगी बन जाती हैं रागिनी..
जो गाई जाती हैं हर साँस पे दिल से.

खो गये तुम तो हम किसे पाएँगे
प्यार के असीम सागर मे डूब ही ना जाएँगे..

मत बिखरो मेरे यार
मुझमे समेटने का दम नही..
कहीं समेटने मे तुम्हे
खुद ही ना बिखर जाउ मैं

थमी थमी सी जिंदगी
रुके रुके से हम
ऐसे मे..आकर थाम लो मुझको
मेरे सनम.........

जो मर गया हो खुद ही उसे कौन मार सकता हैं
क्यूँ करते हो झूठे बहाने..बताओ आज 
तुमपे कौन कौन मरता हैं..

रूठे यार को मना लो..
कुछ तो कहो ऐसा..
प्यार से हंसा लो..


Tuesday, January 8, 2013

कौन करेगा चाँद की मिन्नते ..कौन नाज़ उठाएगा..??



आँखो का जाम अच्छा..सुन तेरा नाम.... मेरे नाम से अच्छा

माँ की दुआ का ये असर निकला..
बेटा मुसीबतो के कहर से भी बेअसर निकला..
मिली जो छाँव आँचल की..
आँचल मे ही खुदा निकला..

सो गये तुम तो हमारा क्या होगा..
देखो सपने सारी रात..जागना हमारा होगा..

संभाल के रखना मेरा ये गुलाब का फूल
कहीं ना बन जाए किसी दिन ये तेरे लिए शूल

भूले बिसरे लम्हे फिर से याद आते हैं
जब भी चलती हैं बर्फ़ीली हवा तेरे वादे याद आते हैं 

मत सुनना दिल की बात
सनम का भूल जाना
रुसवाई की बात
हैं भरोसा जो खुद पे..
मत देना दुहाई ...लौट आने की..बात

नही समझे जवाब तो साथ आया हैं
भीगा हैं जो खत..आँसू से धुल आया हैं.

क्या करे अतीत को गले लगाया हैं
भविष्य हैं कि अभी पराया हैं..
वर्तमान हैं अभी छोटा सा..
अपने पैरो पे खड़ा नही हो पाया हैं..

गर समय को समय पे पहचान लिया 
समझो एक बार मे सारा संसार नाप लिया..

जमाने मे हैं दहशत ज़्यादा
हम भी हैं दर्द मे डूबे..
कोई कैसे हमसे रूठे..
हम भी हैं अपने मे डूबे

प्यार हुआ जो सूरज से चाँद कहाँ जाएगा
कौन करेगा चाँद की मिन्नते ..कौन नाज़ उठाएगा..??

उदासी




उदासी का मंज़र
जब भी आता हैं..
मैं झट से उसकी चौखट को
खटखटाता हूँ.
निकल आती हैं उसकी यादें
बेचैन हो जाता हूँ..
लेकिन फिर भी खुश हूँ...
उसके साथ...साथ हैं उसकी बात..
हर लम्हा..बस उसी को
महसूस किए जाता हूँ..

लो लौटा रही हूँ तुम्हे तुम्हारे हर्फ..जो अब तक संभाल के रखे थे..


एक पुरानी ज़मीन को खोद के देखा तो  

देखा तुमने उसपे कुछ हर्फ लिखे थे..वो  
तुम्हारे हर्फ बदल चुके थे.... 
किसी की सच्ची मोहब्बत मे.. 
उन्हे उठाया उल्टा पुल्टा तो.. 
एक धुंधला सा नाम नज़र आया... 
शायद मिटने की कगार पे था.. 
थोड़ा सा पोछा उस पे पड़ी धूल को.....  
चमक उठी तुम्हारे प्यार की दास्तान 
जिसे सिर्फ़ अब तुम्हारी ही ज़रूरत थी... 
क्यूँ ..................हैं ना  


Monday, January 7, 2013

जिंदगी की सांझ मे कुनकुनी धूप






जिंदगी की सांझ मे कुनकुनी धूप
सच उतर आए आँगन मे तो..
जिंदगी भी सुहानी हो उठती हैं
प्यार का लंबा सफ़र ....
मनचाहा साथी...
जिंदगी की रागिनी गा उठती हैं...
नाच उठता हैं मन का मयूर..
लंबी जिंदगी भी ठहर जाती हैं....
देखती हैं खुद को खुद से......
रह जाते हैं कुछ एहसास अनोखे से..
जो  ता उम्र जिंदा रखते हैं प्यार की उष्मा को..
कभी पानी ना पड़ने देते अपने प्यार पे..
यही हैं प्यार का ठहराव...जिंदगी का ठहराव..
मन का ठहराव.....

देश का क़ानून


क्या समझते हैं खुद को
देश के नेता, ढोंगी संत,  पाखंडी पुरुष की  जमात
जो मुँह मे आए कह देंगे ..निकाल देंगे अपने मन का रोष...
कोई नही इन्हे रोकने वाला..
एक आए और कह गये..
ठीक से कपड़े नही पहनती हैं लड़किया...
इसलिए होता हैं.......तो कोई हमे बताए 
विदेशो मे तो सब खुले आम घूमती हैं
उनके साथ ये क्यूँ नही होता हैं..
हमारे यहाँ तो जो गाँव मे पूरे कपड़े पहने 
औरते काम करती हैं उनके साथ भी ये सब होता हैं
एक आई और बोली..मोबाइल से सब होता हैं 
कौन इन्हे समझाए मोबाइल तो
अपनी सुरक्षा के लिए भी होता हैं..
अगर ऐसा हैं तो आप मत रखो
अब बापू बोले...दीक्षा नही ली इस कारण हुआ..
क्या जो दीक्षा लेते हैं वो मन वचन कर्म से 
शुद्ध हो जाया करते हैं..
ये खेल तो सदियो से होता आया हैं..
इसमे सब कुछ मन से होता हैं..
निकलता हैं जब भीतर का जहर 
तो पुरुष हिंसक हो उठता हैं..
इसमे कपड़ो की, रात की या ................
फिर किसी और बात की ग़लती नही .होती हैं...
लड़की का लड़की होना ही 
सामने वाले के लिए काफ़ी होता हैं..
जब वो कोमा मे पड़ी लड़की को नही छोड़ते ...
काम वाली बाई को नही छोड़ते तो...
सुन्दर लड़की की क्या कहे..
अगर सफाई करनी हैं तो इनकी 
विक्रत मानसिकता की सफाई जड़ से करे..
तभी कुछ हो सकता हैं....तभी देश का कोई क़ानून 
अपना काम ठीक से कर सकता हैं..