Friday, June 5, 2020

शहर में बारिश और तुम्हारी बेसबब याद



वो तेज़ दौड़ती 
काली मोटर साइकिल
हवा में लहराते 
तुम्हारे बाल
गोल गोल सीटी बजाते 
तुम्हारे ओठ
बेफिक्र सी हंसी
सोच में तुम्हारी 
हर वक़्त मैं

कालेज के बाहर 
मेरे छुट्टी होने का इंतज़ार
हल्की सी बारिश
तुम्हारा गहरी आंखों से
मुझे देखना
फिर शहर से दूर
छोटी सी टपरी में 
बैठकर गरमा गरम चाय पीना
मेरा जल्दी घर पहुचने के लिए
व्याकुल होना

सब वक़्त के साथ खो गए
हम तुम दोनों बड़े हुए!!!


Tuesday, June 2, 2020

इश्क़ के नशा

इश्क़ का नशा 
यू उतरने न देना

थाम लेना हाथ 
मुँह फेर यू 
जाने न देना

लगा लेना गले 
गर वो कुछ गमगी लगे

पोछ देना अश्क 
अपने आँचल से
एहसास देना 
अपने करीब होने का!!

उम्र के दूसरा पड़ाव




वक़्त ने
बांध दिए थे
जो हाथ
अब उम्र ने
खोल दिये है

नई उमर में
पनपा था जो प्रेम
जिसपे मजबूरी के
नमक छिड़क दिए गए थे
कर दिए गए थे अलग
भिन्न भिन्न कारणों से
कहीं जाति, कहीं धर्म,
कहीं गरीबी की दुहाई देकर,
मार दी गई थी
मासूम भावनाये

बहा दिए गए थे
अलग अलग रास्तो पे
तय करने
किस्मत की मंजिल

दे दिए गए थे
बड़े बड़े पड़ाव
जिंदगी के!
माँ, सासु माँ, पिता
सारे अनुभव
जिंदगी में उतार दिए
अब जब जीवन साथी ने भी
मोड़ लिया मुँह
अकेला छोड़
चल दिया
दूसरी दुनिया मे
देकर जिंदगी के
झंझावात...

अब कोई जिम्मेदारी नही
बेटी दामाद के पास
बेटा बहु का हो चुका है
अपने पास है जीने को
एक मात्र पेंशन
और क्या चाहिए
दवाई और महीने का खर्च
आसानी से चल जाता है
जिंदगी बस चल रही है!!

मिले है अब जाकर
एक ही रास्ते पे
मुद्दतों बाद
किस्मत से

चलो दुख-सुख बांट ले
जो नही कह सके तब
उसे अब कह ले
देर से ही सही
जीवन की गाड़ी
दुरुस्त तो आयी है
एक बार फिर जी ले
बिना किसी रोक टोक के

एक बेधड़क जिंदगी!!!


Monday, June 1, 2020

फिर मिलूंगा अगले जन्म में



रह जाते है निशान
हम कहीं खो जाते है

दुनिया की नजरों से 
होकर ओझल 
हम दूर
कही नई दुनिया बसाते है

फिर आएंगे तुमसे मिलने
ये झूठा वादा 
एक बार फिर किये जाते है!!😢

तुम ही इलाज हो मेरा


सूनी सड़के 
तकेगी रास्ता तुम्हारा
तुम आओगे नही
ये मुझे मालूम है

एक तो गम 
एक दूजे से 
जुदा होने का
फिर तुम्हारा 
यू बिना बात 
ख़फ़ा होना
ऐसे जैसे
सरदर्द के साथ, 
बुखार का 103 डिग्री हो जाना

अब तो 
तुम्हारा आना ही 
इलाज है
वरना 
मिलेंगे

दूसरी दुनिया मे
नए चेहरे, 
नए लिबास के साथ
नए कलेवर में

गुरु से बड़ा न कोय??


बिछुड़ा हुआ आदमी
न पहुँच पाया कही
लिया वेदों, 
ऋचाओं का सहारा
पढ़ी गीता, रामायण
बाँचा संसार सारा
बंद ताले भला 
कैसे खुलते????

जब तब न लिया 
जीवित गुरु का सहारा

(गुरु हर बंद ताले की चाबी होते है।)

प्रेम


प्रेम रहा फलता फूलता
मन ही मन
लेता रहा इज़ाज़त
एक दूसरे में खोने की

प्रेम के लिए मिलना कोई जरूरी न था!!!

(कॅरोना काल का प्रेम)

शानदार बुढापा कैसे जिये???



कोई साथ दे न दे
बुढापा साथ देता है
बचपन जवानी 
दिखा के झलक अपनी
रवाना हो लेते है
बुढापा मौत के संग 
निभाता है यारी 
लेकिन इसकी दोस्ती
होती है मजबूरी
किसी को नही लगती प्यारी

बुढ़ापे को 
शानदार जीना है तो 
कुछ नियम अपनाओ
किसी के काम मे 
दख़ल न दो
जो मिल जाये 
उसे प्रेम से खाओ

मत बोलो ज्यादा
न ही ज्यादा 
रोब जमाओ
अपनी पूंजी को रखो 
दबाकर कस के 
अपनी मुट्ठी में
मोह में आकर किसी के
न इसे गवाओ

न सुने कोई तो 
अपनी सेवा में 
नौकर लगाओ
बचाकर क्या करना है 
धन को
दवा, फल, जूस 
जो जी करे 
खूब खाओ
कम बोल कर 
रखो अपनी  इज़्ज़त 
अपने हाथ
दोस्तो संग 
ऐश मनाओ

माँ है तो मासूमियत है


माँ 
तुमसे ही जिंदा है 
मासूमियत मेरी
शैतानियां मेरी
रूठना मेरा
मनाना तुम्हारा

क्योंकि तुम ही तो देखती हो 
हर वक़्त 
मेरा 
हर चेहरा

उदासियों का शहर


उदासियों के शहर में 
रहना बहुत मुश्किल है
लेकिन 
दिल है कि उसे
वही पसंद है

करती हूँ 
कोने कोने की सफाई
फिर भी न जाने 
किस झिर्री से
दिल मे घुस जाती है 
उदासी

दबोच लेती है 
मनोमस्तिष्क को
उन विचारों को, 
जिनसे मैं पहले 
दिन भर ऊर्जान्वित
रहती थी

खोल देती है 
वो सारे द्वार
जहाँ से प्रवेश कर सके 
वो सब दुःखद यादें 
जिन्हें मैं फिर नही 
 बुलाना चाहती

यादों को बार बार
अंक में समेटना 
अब मेरे वश में नही 
दोस्त

उदासी को कहो
कुछ देर 
कही और 
विश्राम करे...

मुझे भी सुलझाना है 
अभी अपना 
उलझा हुआ मन

जिसे मैं सबको दिखा
नही सकती!!😢

बारिश पे मासूम सी कविता



जी भर कर देखो 
काले बादल को
देखो मैं घर आयी हूँ, 

छोटी छोटी बूंदे बन कर
सुरमई आँखों मे समाई हूँ,

छू कर मुझ को 
नर्म बाहों  से, 

फिर मुझको, 
चंदन जैसा 
कर दो न,

अपने जैसा 
असर दो न !!

ईश्वर की परीक्षा


दुखाते हो उसी का दिल
जिसे तुम प्यार करते हो.....ये क्या है भगवान????

अंतर की पीड़ा
दिल से निकाल
उड़ेल दूंगी
उस ईश्वर के आगे
जो मुस्कुराता है
तकलीफे देकर

लेकिन ईश्वर

देखना चाहता है 
एक पूर्ण गुरु की तरह
मेरा शिष्य 
कितना होशियार है

कैसे होशियारी से
हल करता है 
जिंदगी के कठिन प्रश्न
जो उसने सिखाये थे
अपनी रोज़ की कक्षा में
कभी हमें हमेशा की तरह

दर्द

धरती पे पड़े 
सूखे पत्ते देख कर, 
आती है 
दिल मे उदासी...

टूट गया जो 
हमेशा के लिए
अब कई दर्द दे जाएगा
टीसता रहेगा
वो दर्द बरसो
रहना होगा
उसी दर्द के साथ...

जब तक दर्द नया न आएगा😢😢

Lockdown शायरी

जो जी चाहे, मेरा मज़ाक बना लो,
मैं एक स्त्री हूँ,  मुझे हर तरह से आजमा लो।।

प्यार से प्यार को सींच रही है धरती
मोहब्बत के फूल खिलने ही वाले है

शब्द भी होते है
तिलिस्म से,
जादूगर की मानिंद
वक़्त गुजर जाने के बाद

हाथ आते है

Gud heart's never lie

सारी हक़ीक़त का एक फ़साना
तुमने देख लिया खूबसूरत दिल...

हमने देख लिया जमाना

मंजिले खेल है
किस्मत का

बदकिस्मत ....
दौड़ा ही करते  है..... पहुँच फिर भी नही पाते !!

भेज दो कुछ यहां भी
हसीन मौसम की हलचल

मेरा शहर बहुत उदास है💐💐💐💐

तुम्हे देकर उफ़्फ़/ आह
वो खुश होता
देखो न
पुरुष का प्यार
कैसा अजीब होता है???😢

कुछ दिनों की है तक़लीफ़ें
चुटकियों में गुज़र जाएगी।

होगी फिर होली, दीवाली मिलकर एक साथ,

खुशियां वापिस घर आएंगी।


Sunday, May 31, 2020

उर्मिला का दुख (लक्ष्मण जी की पत्नी)



महलों में रही,
सुकू पा न सकी
ढूंढती रही हर जगह,
अपने प्रिय प्यार को

मंजिले बढ़ती गई,
उम्र घटती गई
बेचैनियों ने बढ़ा दी
मियाद दूरी की

यहां से वहाँ तक
भटकती रही
राह तकती रही,
आह भरती रही

तुम आये भी तो क्या
तुम आये भी तो क्या????😢