Thursday, August 23, 2018

चाय का स्वाद



तुम्हारी वफा
तुम्हारा दर्द
तुम्हारे प्यार से
अपना कहना
सब मौजूद है मुझे
चाय में चीनी की तरह

चाय का स्वाद तो फिर भी भूल जाता है अगली चाय के आने तक

तुम हो कि रच बस गए हो मुझमें
चाय के रंग की तरह

जिस्म की ऐसी तैसी

जिस्म से रूह की
कब पटी है
रूह तो न जाने कब से जिस्म को
अलग करने के लिए
खड़ी है
ये जिस्म ही रोज बहाने बनाता है
साठ सत्तर साल खुद को चुटकियों में
खींच ले जाता है
रूह ठगी रह जाती है
जानती है
ये जिस्म की मनमानी है
फिर भी

रूह हार नही मानती
एक दिन
मेहनत रंग लाती है
रूह जीत जाती है
जिस्म की ऐसी तैसी कर उसे बेदर्दी से
खींचती  हुई ले जाती है।

नया सफर

फिर से
जारी करना होगा सफर
नई तारीखे,
नई नजर
एक दिन ऐसा आता है
सब छोड़ना पड़ता है
कभी ख़ुशी के लिए
कभी मजबूर होकर
कभी ख़ुदा के बनकर

तू खुशनसीब है
देख सकती है
नए सपने
मैने तो देखे है
सपने
बिखरे हुए
जिन्हें कोई बटोरने वाला नही
सूना घर,
सूनी दीवारे,
सन्नाटे की सांझ,
रोती हुई रात
जहां कोई नही मनाने वाला

बेचारी बुआ

चलो अच्छा हुआ
बुआ चल दी राम जी के पास
कब तक सहती हाड़तोड़ काम की मार
फूफा की बेजारी
कहते है एक पन में प्यार बहुत मिलता है
चाहे ससुराल में
चाहे मायके में
लेकिन बुआ तो प्यासी की प्यासी ही रही
कबीरदास के भजन की तरह
पाक पवित्र
ज्यूँ की त्युं धर दीनी चदरिया
धन्य थी बुआ
जो इतने दुख के बाद भी
बिना उफ्फ कहे
चली गई धरती से

कर्म रथ

सब आवाज़ों को
यू ही
बर्फ हो जाना है
मेरी
तुम्हारी
सबकी
गरम लहू को
ठंडा होकर जम जाना है
लेकिन उसके पहले हमें
चलते जाना है
कर्म रथ पे

तुम्हारा साथ


तुम साथ नही हो
फिर भी साथ हो
मेरी रूह में
मेरी जात में
मेरी हर बात में
तुम्हारी ही झलक है
मेरी ताक़त हो तुम

भले नही हो
बाहर से मेरे साथ
फिर भी तुम्हारे सुझाये उपाय
मुझे आज भी मार्गदर्शित करते है
भरते है मुझमे उत्साह
नित नया मुझे करते है।

माँ


माँ की तरह कौन संभाल सकता है
माँ होती है तो हर दुख छोटा  लगता है
माँ की गोद मे सारे सपने सच्चे लगते है
माँ के साथ हमेशा भले बड़े हो जाये फिर भी
बच्चे लगते है
माँ समेट कर अंक में हमें
हमे दुनिया भुला देती है
सही मार्ग दर्शन से अच्छा इंसान बना देती है
माँ सा हमसफर हमें कभी नही मिलता
दुनियादारी की समझ माँ से ज्यादा कोई नही दे सकता
माँ तुम्हारे साथ दुनिया रंगीन हो जाती है
बिना तुम्हारे तो जैसे सांसे भी रुक सी जाती है
माँ का आशीर्वाद हर दुख में मरहम का काम करता है
माँ गर झूठे मुँह से फूँक भी दे तो बड़े से बड़ा गम
हवा हो जाता है
माँ पिता से बड़ा कोई नही होता
इनके हम ऋणी जन्म जन्म
माँ हम तेरे बच्चे
तू मेरी माँ
हर जनम