Tuesday, August 16, 2016

वादा जो निभा न सके हम


तुमने कहा था 
साथ जिएंगे
तुम्हारे साथ 
जी तो न सकी
हां तुम्हारी यादों में रोज़ 
तिल तिल करकें 
मर जरूर रही हूँ
कोई रात ऐसी नहीं जाती
जो आँखे 
तुम्हारी यादों से न भीगे
कभी कभी तो 
आंसू का सैलाब
रोकना मुश्किल हो जाता है
कितनी बेबसी है न
इंसान हंस तो सबके सामने
सबके साथ सकता है
लेकिन 
रो नहीं सकता
कौन व्यक्ति 
क्या मतलब निकाले
कुछ पता नहीं होता
तुम्हारी यादों ने 
मुझे भीतर से
तोड़ सा दिया है
तुम्ही बताओ 
अब इस बेवजह
बेसबब 
जिंदगी का क्या करूँ
तुम थे तो मौसम भी 
रंगीन हुआ करते थे
अब तो सूनी रातें, 
खाली सूखी बरसाते, 
पतझड़ सा बसंत

कुछ भी अच्छा नहीं लगता
जितना कठिन साथ जीना है
उस से भी ज्यादा मुश्किल है 
साथ मरना
दुनिया को कहाँ अच्छा लगता है 
दो लोग एक साथ 
एक ही जगह
खिल खिलाकर रहे
तुम्ही निकालो न 
कोई रास्ता
क्योंकि 
जब भी जिंदगी में फँसी
उलझी
तुमने ही मुझे उबारा 
मेरे ट्रबल शूटर 
तुम्ही तो रहे हो हमेशा

इस बार भी कुछ करो न
नहीं जी सकती 
तुम्हारे बिना
क्योंकि 
तुमको आउट ऑफ़ फ्रेम करके
कभी कुछ सोचा ही नहीं
हमेशा 
अपने फायदे की बात सोची
तुम दोगे मुझे कन्धा
पंहुचा कर आओगे 
मुझे मेरे आखिरी गंतव्य तक
लेकिन तुम तो 
पहले ही चल दिए
मुख मोड़ कर
बिना कुछ बताये
बिना कोई आगे के 
इंस्ट्रक्शन दिए
बोलो क्या आदेश है
मुझे अभी भी 
तुम्हारे हुक्म का इंतज़ार है
आओ और पूरा करो 
अपना वादा
जिंदगी भर साथ निभाने का
साथ चलने का
बुढ़ापे में साथ निभाने का
दांतो के एक सेट से ही
काम चलाने का

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